अग्रवाल समाज के मूल पुरुष और आग्रेय गणराज्य के संस्थापक - महाराज अग्रसेन
- समाचार का दिनांक :13-09-2022 280 Views
भारतेंदु हरिश्चंद्र के अनुसार, महाराजा अग्रसेन का जन्म महाभारत महाकाव्य काल में द्वापर युग के आखिरी चरण में हुआ था और अग्रसेन भगवान कृष्ण के समकालीन थे। महाराजा अग्रसेन राजा वल्लभ देव के पुत्र थे, जो भगवान राम के बेटे कुश के वंशज थे। इन्होंने लिखा है कि अग्रसेन का विवाह राजा नागराज कुमुद की बेटी माधवी से हुआ था।
महाराजा अग्रसेन वैश्य समाज के संस्थापक माने जाते हैं। महाराजा अग्रसेन अग्रोहा के एक महान भारतीय राजा थे। महाराजा अग्रसेन को पौराणिक समाजवाद के प्रर्वतक, युग पुरुष के तौर पर याद किया जाता है। अग्रसेन पशु बलि के खिलाफ थे और इसलिए उन्होंने वैश्य धर्म स्वीकार किया था। 7 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन की जयंती है। अग्रसेन जयंती हिंदू कैलेंडर के अश्विन महीने के चौथे दिन मनाई जाती है और इस साल यह 7 अक्टूबर को है। महाराजा अग्रसेन को वैश्य समाज के पिता के रूप में पूजा जाता है और उनकी जयंती मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है। क्षत्रिय कुल में जन्मे महाराजा अग्रसेन जिस शहर अग्रोहा के राजा थे वह एक व्यापारियों का शहर था। कहा जाता है कि इस शहर की स्थापना भी महाराजा अग्रसेन ने की थी।
महाराजा अग्रसेन ने समाज में एकता और सद्भाव का उपदेश दिया था। यही कारण है कि मुख्य रूप से उनके अनुयायी अग्रसेन जयंती के दिन गरीबों में मुफ्त भोजन और दवाईं बाटंते हैं। महाराजा अग्रसेन के सम्मान में भारत सरकार ने 1976 में उनकी 5100वीं जयंती पर एक डाक टिकट भी जारी किया था। महाराज अग्रसेन की जयंती भारत में खासकर हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है।
-धार्मिक मान्यतानुसार महाराजा अग्रसेन का जन्म सूर्यवंशीय महाराजा वल्लभ सेन के अंतिम काल और कलियुग की शुरुआत में आज से लगभग 5143 वर्ष पूर्व हुआ था। महाराजा अग्रसेन समस्त खांडव प्रस्थ, बल्लभ गढ़, अग्र जनपद के राजा था। कहा जाता था कि उनके राज में कोई भी दुखी और लाचार नहीं था। हालांकि बाद में महाराजा अग्रसेन उत्तर भारत में आकर बस गए और यहीं इन्होंने अग्रोहा शहर की स्थापना की।
धार्मिक मान्यतानुसार महाराजा अग्रसेन भगवान राम के पुत्र कुश के 34 वीं पीढ़ी के माने जाते हैं। कहा जाता है कि 15 साल की उम्र में अग्रसेन पांडवों के पक्ष से महाभारत युद्ध लड़ा था। कहा ये भी जाता है कि भगवान कृष्ण ने कहा था कि अग्रसेन कलयुग में एक युग पुरुष बनकर अवतरित होंगे, जो द्वापर युग की समाप्ति के बाद शुरू होगा।
अग्रसेन जयंती_विशेष
नाम - कुंवर अग्रसेन (महाराज अग्रसेन जी)
जन्म - शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, अश्विन मास, 5144 वर्ष पूर्व..
जन्म भूमि - प्रतापगढ़
पिता - महाराज श्री वल्लभसेन
माता - महारानी भगवती देवी
पत्नी - महारानी माधवी
गद्दी - अग्रोहा, हरयाणा
कुलदेवी- हरिप्रिया महालक्ष्मी
कुलदेवता - भगवान विश्वनाथ
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - अग्रवंश
कुलगुरु - महर्षि गर्ग
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - महाभारत युद्ध
पूर्वाधिकारी - महाराज वल्लभसेन
उत्तराधिकारी - महाराज विभुसेन
ध्वज - सूर्य पताका
राज चिह्न - एक स्वर्ण मुद्रा और एक ईंट
महाराज अग्रसेन के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-
1- महाराज अग्रसेन का जन्म काशी विश्वनाथ के आशीर्वाद से और उनके अंश से हुआ था इसलिए उन्हें शिव रूपाय भी कहते हैं।
2- महाराज अग्रसेन ने मात्र 16 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ महाभारत युद्ध में भाग लिया था। इन्हें श्री कृष्ण का सानिध्य और आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ था।
3- महाराज अग्रसेन का विवाह त्रिपुरा के शक्तिशाली नागवंश की राजकुमारी महारानी माधवी से हुआ था। महाराज अग्रसेन के स्वसुर नागराज महीधर ने सूर्यवंशियों और नागवंशियों के मेल की यादगार स्वरूप और महाराज अग्रसेन के सम्मान में अग्रतल बसाया था। जिसे आज अगरतला कहते हैं जो त्रिपुरा की राजधानी है।
4- महाराज अग्रसेन के राजकुमारी माधवी से विवाह से देवराज इंद्र को ईर्ष्या हुई और उन्होंने अग्रोहा गणराज्य में वर्षा बंद कर दी। तदोपरांत कुलदेवी महालक्ष्मी के आशीर्वाद से महाराज अग्रसेन ने इंद्र का मानमर्दन किया था।
5- महाराज अग्रसेन वंशकर राजा थे, अर्थात जिसके नाम से उसके कुल को जाना जाए। इससे पूर्व इक्ष्वाकु वंश में रघु वंशकर राजा हुए हैं जिनके नाम पर इस कुल का नाम रघुकल भी है।
6- महाराज अग्रसेन कुलदेवी महालक्ष्मी के अनन्य भक्त थे उन्होंने अपने जीवनकाल में तीन बार महालक्ष्मी को प्रसन्न करके वर हासिल किया था। उन्होंने राज्य के मध्य में एक भव्य रत्नजड़ित श्रीपीठ का निर्माण करवाया था।
7- महाराज अग्रसेन ने समाजवाद का प्रथम दर्शन दिया था एक मुद्रा और एक ईंट के रूप में इसीलिए उन्हें समाजवाद का प्रथम पुरुष भी कहते हैं।
8- महाराज अग्रसेन का राज्य ध्वज पीत रंग का था जिसपर सूर्यचिन्न अंकित था -
"शिखरे राजभवने महोचछायध्वजोत्कटे।
अलक्ष्यत ध्वजं पीतवर्णं भानुसुलक्षणं ।।"
- अग्रभागवत- 10:31
9- महाराज अग्रसेन ने आग्रेय गणराज्य की नींव रखी थी।पणिनि ने आग्रेय गणराज्य को आयुद्धजीवी संघ लिखा है जो अपने अप्रतिम शौर्य के लिए जाना जाता था। जिसने सदियों तक देश की सीमा की शकों और हूणों से रक्षा की थी।
10 - महाराज अग्रसेन के सिद्धान्त एक रुपया एक ईंट का सफल प्रयोग श्री अशोक सिंघल जी ने रामजन्मभूमि आंदोलन में किया। हर हिन्दू के घर से मंदिर निर्माण के लिए एक रामनामी ईंट आयी और विहिप ने घर घर जाकर 1 रुपया का दान लिया।
11- भारतीय राज्यमार्ग NH-9 का आधिकारिक नाम महाराज अग्रसेन के नाम पर है जो दिल्ली से अग्रोहा होते हुए पाकिस्तान बॉर्डर तक जाता है।
12- सन् 1976 में भारत सरकार ने महाराज अग्रसेन के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। सिर्फ भारत सरकार ही नहीं बल्कि मालदीव देश की सरकार ने भी 2016 में महाराज अग्रसेन के नाम पर डाक टिकट जारी कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया था। सन् 2021 में हरियाणा सरकार ने हिसार के एयरपोर्ट का नाम महाराजा अग्रसेन के नाम पर रखा।
जनक पिता बनकर इन्होने नव समाज निर्माण किया इनके ही विचारों के कारण आज अग्रवाल जाति ने उद्धार किया |