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रक्षा बंधन 2022: 11 या 12 अगस्त कब मनाया जाएगा रक्षा बंधन? 

  • समाचार का दिनांक :10-08-2022 295 Views
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रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई बहन को रक्षा का वचन देते हैं 

रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता है। यह त्योहार हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिन यानी 11 व 12 अगस्त को त्योहार मनाया जाएगा। दो दिन पूर्णिमा तिथि होने से लोगों के बीच असमंजस है कि आखिर किस दिन राखी का त्योहार मनाना शुभ रहेगा और रक्षासूत्र बांधने का उत्तम मुहूर्त क्या है। 

11 या 12 कब है रक्षा बंधन 

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो कि 12 अगस्त को सुबह 07 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। ऐसे में लोग दुविधा में हैं कि रक्षा बंधन का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा या फिर 12 अगस्त।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 11 अगस्त को भद्रा काल की साया होने के कारण कुछ लोग रक्षा बंधन का पर्व 12 अगस्त को मनाएंगे।

11 अगस्त को भद्राकाल सुबह से रात 08 बजकर 51 मिनट तक है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद किसी भी शुभ कार्य की मनाही होती है। इसलिए बहनें भाई को न ही भद्राकाल में राखी बांध सकती हैं और न ही रात में। इसलिए कुछ पंडित 12 अगस्त को ही रक्षा बंधन मनाना शुभ मान रहे हैं। अगर आप रक्षा बंधन 12 अगस्त को मना रहे हैं तो सुबह 07 बजकर 05 मिनट से पहले ही राखी भाई की कलाई पर बांध दें। 

• धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूरब दिशा में और बहन का पश्चिम दिशा में होना चाहिए। 

• सबसे पहले बहनें अपने भाई को रोली, अक्षत का टीका लगाएं। 

• घी के दीपक से आरती उतारें, उसके बाद मिष्ठान खिलाकर भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधें। 

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र केवल 5 मिनट तक 

कई जातकों का इसमें प्रश्‍न है कि उत्तराषाढ़ा युक्त श्रवण नक्षत्र में उपा कर्म रक्षाबंधन  2022  नहीं करना चाहिए। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र दो मुहूर्त यदि हो तो उसका दुष्प्रभाव होता है, लेकिन रक्षाबंधन के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र केवल 5 मिनट तक रहेगा, जबकि एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है। यह तथ्य भी यहां पर लागू नहीं होता है। 

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12 अगस्‍त को इसलिए नहीं है रक्षाबंधन क्योंकि 12 अगस्त को पूर्णिमा (Poornima) प्रातः 7 बजकर 6 मिनट पर समाप्त हो जाएगी, जो सूर्योदय के बाद 18 मिनट ही होते हैं जो कि एक मुहूर्त से भी कम है। निर्णय व धर्मसिंधु ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद युक्त प्रतिपदा व धनिष्ठा युक्त नक्षत्र में श्रावणी उपाकर्म (जनेऊ धारण) करना शास्त्रों में निषेध माना गया है। 11 अगस्त को पूरे दिन भद्रा व्याप्त है, परंतु भद्रा मकर राशि मे होने से इसका वास पाताल लोक में माना गया है। 

यह स्पष्ट है कि मेष, वृष, मिथुन, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु या मकर राशि के चंद्रमा में भद्रा पड़ रही है तो वह शुभ फल प्रदान करने वाली होती है। रक्षा बंधन का पवित्र पर्व भद्रा रहित अपराह्न पूर्णिमा में करने का शास्त्र विधान है। यदि अपराह्न कालिक पूर्णिमा ना हो रक्षाबंधन नहीं मना सकते। 12 तारीख को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक है, तो मनाने का प्रश्न ही नहीं होता। भद्रा पाताल की है। दोषमुक्त है। 

दोष पाताल में बली लक्ष्मी को होगा।  क्योंकि इस समय साकल्य पादित पूर्णिमा का अस्तित्व होगा इस वर्ष 11 अगस्त 2022 को अपराह्न व्यापिनी पूर्णिमा में भद्रा दोष  व्याप्त है और आगामी दिन 12 अगस्त शुक्रवार को पूर्णिमा त्रि मुहूर्त व्यापिनी नहीं है। पूर्णिमा केवल 7 बजकर 6 मिनट पर समाप्त हो रही है। 

अतः उपरोक्त शास्त्र निर्णयानुसार रक्षाबंधन 11 तारीख को ही है। इसलिए सभी विद्ववानों के अनुसार अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 26 मिनट से दोपहर एक बजकर 34 मिनट तक है। भद्रा पुछ 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 53 तक है।

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